केंद्री धान खरीदी केंद्र अभनपुर में भारी अव्यवस्था धान सड़ रहा, चूहे काट रहे बारदाने, गोदाम में पड़ी खाद भी खराब – जिम्मेदार कौन?

केंद्री धान खरीदी केंद्र अभनपुर में भारी अव्यवस्था धान सड़ रहा, चूहे काट रहे बारदाने, गोदाम में पड़ी खाद भी खराब – जिम्मेदार कौन?

अभनपुर (रायपुर)।
रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र स्थित केंद्री धान खरीदी केंद्र में भारी अव्यवस्था और लापरवाही का मामला सामने आया है। केंद्र में खुले में रखा धान न केवल बारिश और नमी से खराब हो रहा है, बल्कि चूहों और जानवरों के कारण भी सैकड़ों टन धान को नुकसान पहुंच रहा है।

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि धान खरीदी का कार्य तो पूरा हो चुका है, लेकिन स्टॉक से धान उठाने की प्रक्रिया बेहद धीमी होने के कारण बड़ी मात्रा में धान केंद्र परिसर में ही पड़ा हुआ है। कई स्थानों पर बारदाने फट चुके हैं, जिनमें से धान जमीन पर बिखर रहा है।

बारदाने और दस्तावेजों की भी दुर्दशा

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब सामने आता है कि केवल धान ही नहीं, बल्कि बारदाने और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी खुले में और अव्यवस्थित हालत में पड़े हुए हैं। यदि इनमें नमी या आग जैसी कोई घटना होती है, तो इससे प्रशासनिक रिकॉर्ड को भी भारी नुकसान हो सकता है।

खाद गोदाम में भी लापरवाही

केंद्र से जुड़े खाद गोदाम की हालत भी कुछ अलग नहीं है। किसानों का कहना है कि यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसी महत्वपूर्ण खाद लंबे समय से गोदाम में पड़ी हुई है, जिससे वह खराब हो रही है। एक ओर किसान खाद की कमी से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खाद यूं ही बर्बाद हो रही है।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में केंद्र प्रभारी, संबंधित विभागीय अधिकारी और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों के अनुसार समय-समय पर स्टॉक की निगरानी, सुरक्षित भंडारण और शीघ्र उठाव की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते धान का उठाव और उचित भंडारण किया जाता, तो इस नुकसान को रोका जा सकता था। कुछ लोगों ने तो लाखों रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान और भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है।

तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि

  • जिला प्रशासन द्वारा तत्काल मौके पर जांच कराई जाए

  • धान स्टॉक, बारदाने और खाद भंडारण की भौतिक सत्यापन हो

  • जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

  • भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

यदि समय रहते इस गंभीर लापरवाही पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला बड़े आर्थिक नुकसान के साथ-साथ किसानों के विश्वास को भी गहरी चोट पहुंचा सकता है।