मुंशी प्रेमचंद जयंती पर श्री दावड़ा यूनिवर्सिटी में साहित्यिक आयोजन, विद्यार्थियों ने ‘कफन’ का किया प्रभावशाली मंचन

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर श्री दावड़ा यूनिवर्सिटी में साहित्यिक आयोजन, विद्यार्थियों ने ‘कफन’ का किया प्रभावशाली मंचन

रायपुर। हिन्दी एवं उर्दू साहित्य के अमर कथाकार एवं उपन्यास सम्राट की 146वीं जयंती के अवसर पर श्री दावड़ा यूनिवर्सिटी के कला एवं मानविकी संकाय द्वारा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संकाय मंत्र भी पारित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘कफन’ का प्रभावशाली नाट्य मंचन कर उनकी साहित्यिक विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना के साथ देवी सरस्वती के चित्र पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। तत्पश्चात मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों एवं मानवीय मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी समाज को नई दिशा देने में सक्षम हैं।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘कफन’ का सशक्त नाट्य मंचन रहा। इसके अलावा विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों ‘गुल्ली-डंडा’, ‘नमक का दरोगा’, ‘दो बैलों की कथा’ एवं ‘पूस की रात’ का भावपूर्ण कहानी-पाठ भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सुधीजनों ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का सशक्त दस्तावेज हैं तथा उनकी कहानियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं, जितनी अपने समय में थीं।

इस अवसर पर माननीय कुलाधिपति प्रीति दावड़ा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री चिन्मय दावड़ा, महानिदेशक डॉ. चार्मी दावड़ा, मानद निदेशक श्री तुलसीदास संघानी, प्रतिकुलपति डॉ. वरुण गंजीर, कुलसचिव श्री विपिन श्रीवास्तव, अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. डॉ. नितिन जायसवाल, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) मनीषा पांडे तथा समस्त विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ प्राध्यापकगण एवं शिक्षक-वृंद का सहयोग एवं प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) डॉ. आशुतोष शर्मा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई तथा ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया गया।